Tuesday, December 17, 2013

नेताजी का मास्टरस्ट्रोक!



कहते हैं इश्क और जंग में सब कुछ जायज होता है। ठीक उसी तरह सियासत में भी वोट बैंक के लिए सियासतदानों को सब कुछ जायज ही लगता है। सत्ता में काबिज होने के लिए नेता किसी भी हथकंडे को अपनाने से बाज नहीं आते और जब सत्ता में आ जाते हैं तो हो जाती है बल्ले-बल्ले। वैसे भी सियासत में भूत और भविष्य के गठजोड़ से ही वर्तमान का निर्माण होता है और इस बात को यूपी के नेताजी यानी अपने मुलायम सिंह यादव से बेहतर कौन जान सकता है। नेताजी ने भइयाजी को सत्ता की कुर्सी सौंप युवाओं को पास लाने का काम तो काफी पहले कर दिया था। अब पर्दे के पीछे से सीएम अखिलेश के जरिए ऐसा दांव सियासी बिसात पर खिलवाया है कि, रुठे किसान और नाराज संतों के करीब आने का रास्ता साफ करीब करीब साफ हो गया है। जिस अध्योध्या पर आज तक सभी दलों ने सियासी रोटियां सेंकने की ही सिर्फ कोशिश की उसी अध्योध्या से नेताजी और भइयाजी ने अपने पहले दांव का आगाज किया। साधु-संतों को वोटबैंक में शामिल करने के मकसद से अध्योध्या नगरी में एक विशाल प्रवेश द्वार का शिलान्यास कराया है। खास बात ये है कि, इसका नाम श्री राम द्वार रखा गया है। कह सकते हैं कि,इस दांव के जरिए सपा ने एक तीर से दो शिकार किए हैं। पहला संत समाज पर कब्जा जमाने की कोशिश और दूसरा ये कि, जिस राम के नाम को बीजेपी अपना कॉपी राइट मानती आ रही है उसे छीनने की कोशिश। साधु-संतों के बाद सपा सरकार ने दूसरा और अहम दांव पश्चिमी यूपी के किसानों के ऊपर खेला है। सरकार ने चौधरी चरण सिंह की जयंती यानी 23 दिसंबर को गज़टेड हॉलीडे घोषित कर दिया है। काफी लंबे अर्से से ये मांग उठ रही थी,लेकिन सपा ने आम चुनावों के नजदीक आते ही ये मास्टरस्ट्रोक खेल दिया है। अब देखना ये है कि, साधु-संतों और किसानों पर खेला गया ये दांव लोकसभा चुनाव में नेताजी के कुनबे को कितना मजबूत बनाता है। वैसे नेताजी और उनके कुनबे को ये नहीं भुलना चाहिए कि, ये पब्लिक है सब जानती है।