Saturday, February 12, 2011

हुजूर मत आइये आप वरना...



मैंने कहा न तुम मत आओ.देखो अभी भी वक़्त है रुक जाओ.तुम जहाँ हो वही ठीक हो.तुम जानते नहीं हो कि यहाँ तुम्हारे स्वागत के लिए फिर से कुछ तथाकथिक संस्कृति के ठेकेदार. लाठिया लेकर तैयार है.पार्को में अभी से चार पांच लोगो की टोली सिर पर. लाल कपड़ा बांधकर भवरे की तरह मंडराने लगे है.देखो पिछले बार की कहानी से में टूट चूका हू .तुम्हे याद है न किस तरह लोग तुम्हारे आने की ख़ुशी में पलक पवारे बिछाये थे.और कैसे तथाकथित ठेकेदारों ने उसपर पानी फेर दिया.देखो हम नहीं चाहते कि तुम्हारे चक्कर में ऐसे लोगो का दिल टूटे जो तुम्हारे आने का सालो से इंतजार करते है.एक सपना संजो के रखते है कि. तुम्हारे सामने लाल गुलाब के ज़रिये अपनी दिल की बात अपने चाहनेवालो को कहेंगे.जिनकी याद में वो सुबहो शाम खोये रहते है.हम जानते है कि वो पल क्या होता है और सिर्फ हम ही नहीं ऐसे सभी लोग जानते है. प्यार के उस दिन की महता.पर क्या करू यार जब तेल में डुबोये उन लाठियों और उसे हाथो में थमने वाले उन बदमाशो को देखता हू तो सोचने पर मजबूर हो जाता हू कि आखिर क्यों संस्कृति कि याद उन तथाकथित ठेकेदारों प्रेम दिवस के दिन ही आती है.कौन उन्हें समझाए कि जिस भगवन कि वो दुहाई देते है उन्हें भी प्यार पसंद है.कही ऐसे तो नहीं की ये सब वे टेलीविजन पर दिखने के लिए करते है ?.कौन उन्हें समझाए कि नफरत की आग को प्यार के पानी से ही बुझाया जा सकता है.देखो वे लोग इस बात को समझेगे कि नहीं ये तो मुझे नहीं पता पर तुम तो मेरी बात समझ सकते हो.तुम मत आओ.और अगर आना ही है तो कह दो डंके कि चोट पर कि जब जब प्यार पर पहरा हुआ है,प्यार और भी गहरा हुआ है,होता रहेगा.....अंत में सभी प्रेम दीवानों को मेरे तरफ से प्रेम दिवस की हार्दिक बधाई....

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